वर्तमान सदी में शिक्षा मनुष्य जीवन के परिष्कार एवं विकास की प्रणाली है| जीवन के प्रत्येक अनुभव को शिक्षा कहा जा सकता है| वास्तव में समस्त मानव जीवन ही शिक्षा है और शिक्षा ही जीवन है| जो कुछ भी व्यवहार मनुष्य के ज्ञान की परिधि को विस्तृत करे, उसकी अर्न्तदृष्टि को गहरा करे, उसकी प्रतिक्रियाओं का परिष्कार करें, भावनाओं और क्रियाओं को उत्तेजित करे अथवा किसी न किसी रूप में उसको प्रभावित करे वह शिक्षा ही है| शिक्षा-शास्त्र में व्यक्तित्व के संतुलित एवं सम्पूर्ण विकास को शिक्षा का लक्ष्य माना गया है शिक्षा मनुष्य की आन्तरिक शक्तियों का सर्वागीण, अर्थात शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा का विकास है|
संतोष की बात है कि सरस्वती ज्ञान मन्दिर शिक्षा संस्थान इन्दिरा नगर कानपुर ने भारतीय सभ्यता - संस्कृति शिक्षा एंव व्यवस्था नवीन पीढ़ी में हस्तांतरित होने का संकल्प लिया है | वर्तमान में वह इसी दिशा में प्रयत्नशील है |
(संस्थापक)
श्रद्धेय स्व. रामनारायण अग्रवाल
स्वनाम
धन्य स्व. रामनारायण अग्रवाल जी का आविर्भाव १ सितम्बर, १९३१ को प्रतिष्ठित वैश्य परिवार
में बुलंदशहर जनपद के हसनपुर गाँव में हुआ था | आपके पिता स्व. लाला रेवती शरण अग्रवाल
एक संभ्रान्त जमींदार थे | माँ स्व. कमला देवी साध्वी, कृष्ण भक्त महिला थीं | छ: भाई
व तीन बहिनों में आप अपनी माँ की चतुर्थ संतान थे | आपकी प्रारम्भिक शिक्षा दीक्षा
बुलंदशहर व मेरठ में हुई | किशोर वय से ही आप राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के स्वयंसेवक बन गये | इनकी निष्ठा,
कर्मठता एंव लगनशीलता के चलते इन्हे शाखा के मुख्य शिक्षक का दायित्व मिला | भारत सरकार
के मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी आपकी शाखा के स्वंयसेवक थे | शिक्षा
प्राप्ति के उद्देश्य से आप कानपुर आ गये | जहाँ हाईस्कूल से एम. ए. तक की शिक्षा पूरी
की | अध्ययनं के साथ साथ आपने कानपुर नगर में संघ कार्य के प्रचार - प्रसार में अपना
योगदान दिया | उस समय उ. प्र. के पूर्व मुख्य मंत्री एंव सम्प्रति म. प्र. के राज्यपाल
मा. राम प्रकाश गुप्त कानपुर महानगर प्रचारक थे | आगे पढ़े.......