OUR SPECIALITY

  • Recognised by the U.P. Board in Science Stream

  • Declared "A Distinguished Institution” by U.P. Board

  • Co-education from 6th to 12th

  • Conveyance Facilities & well equipped Hostel

  • Science & Computer Labs with latest technology

  • Yoga, Sports and Computer Education is compulsory

  • Separate arrangement for competitive exams

  •   Well equipped Hostel facility

  •   Fully Wi-Fi Campus




अन्वेषिका

वर्तमान शिक्षा पद्धति के अनुसार विधार्थी को एक सुनिशिचत पाठयक्रम के अनुसार ज्ञान प्राप्त करके आगे बढ़ना होता है। अत: वह ''रटो और नम्बर" लाओ का सिद्धान्त अपनाता है।अध्यापक भी इसी प्रक्रिया को अपना कर, सम्पूर्ण अध्यापन कार्य को श्यामपट खड़िया का प्रयोग करके अपने कर्तव्य को इतिश्री कर लेता है।उसका उद्देश्य पुस्तक का सारा कुछ श्यामपट पर लिखकर छात्र की कापी में उतरवा देना होता है। और छात्र उस लिखे को बिना समझे जैसा का तैसा परीक्षा की पुसितका में लिखकर नम्बर ले आता है।प्रायोगिक कार्य की दुर्दशा तो वर्णन ही नहीं की जा सकती।

इस प्रकार विधा भारती की विकासोन्मुखी शिक्षा पद्धति का आधार ही नहीं बन पाता। विधार्थी में छिपी नैसर्गिक,वैज्ञानिक प्रतिभा, स्वचिंतन, अन्वेषण शीलता केगुण विकसित नहीं हो पाते। इन्टरनेट के इस युग में जहाँ स्थान समय की सीमायें विलुप्त होती जा रही हैं, और ज्ञान विज्ञान की प्रगति जिस तीव्रता से हो रही है, हमारा यह कर्तव्य हो जाता है कि छात्र में उक्त सभी गुणों को विकसित किया जाय, उसमें इतनी योग्यता हो कि अपनी रूचि के अनुसार अपनी दिशा पथ स्वयं सुनिश्चित कर सकें।

शिक्षक में इतनी क्षमता होनी चाहिए कि छात्रों की शंकाओं का समाधान कर सके, उसे हर अटकाव भटकाव से निकालकर उसे सही दिशा देकर उसकी खोजी एंवम स्वप्न दृषिटत प्रवृत्ति को जागृत कर सके। आज की डिग्री आधारित पद्धति में आये किसी नये शिक्षक में उक्त गुणों का नितान्त अभाव रहता है, अत:उसे भी विशेष प्रकार की दिशा देना यह विधालय अपना कर्तव्य समझता है।

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