OUR SPECIALITY

  • Recognised by the U.P. Board in Science Stream

  • Declared "A Distinguished Institution” by U.P. Board

  • Co-education from 6th to 12th

  • Conveyance Facilities & well equipped Hostel

  • Science & Computer Labs with latest technology

  • Yoga, Sports and Computer Education is compulsory

  • Separate arrangement for competitive exams

  •   Well equipped Hostel facility

  •   Fully Wi-Fi Campus


thumb_TAH02017.JPGमहानगर के प्रख्यात शिक्षाविद, शिक्षा शास्त्री तथा शिक्षा क्षेत्र के पुरोधा मा. बैरिस्टर नरेन्द्र जीत सिंह तथा तत्कालीन कानपुर विभाग के विभाग प्रचारक वर्तमान में विश्व हिन्दू परिषद् के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष मा. अशोक जी सिंघल की पारखी द्रष्टि ने आपके व्यक्तिव को जांचा, परखा और वहां पर इनकी लगन, निष्ठा, कर्मठता तथा कार्यशैली से प्रभावित होकर कानपुर नगर में सन् १९६१ में जब सरस्वती शिशु मन्दिर की योजना बनी, तो आपको तिलक नगर शिशु मन्दिर में प्रथम प्रधानाचार्य का गुरुतर भार सौंपा | इस प्रकार ये भारतीय संस्कृति से अनुप्रमाणित शिक्षा जगत में प्रविष्ट हुए तब से लेकर आज तक इनका जीवन दीप निरन्तर जलता हुआ शिक्षा क्षेत्र में प्रकाश बिखेरता रहा | आप हिन्दी के प्रचार-प्रसार मर निरन्तर क्रियाशील रहे | इसके लिए हिन्दी प्रचारिणी समिति, कानपुर उ. प्र. ने आपको प्रतिष्ठित "साहित्य सौमित्र" (सारस्वत सम्मान) से सम्मानित किया |

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से प्राप्त गुणों सहजता, सरलता, सादगी, कर्म के प्रतिनिष्ठा सच्चाई, ईमानदारी तथा अन्याय के प्रति प्रतिकार की भावना आप में कूट-कूट कर भरी थी | " सादा जीवन उच्च विचार" की उक्ति आप पर अक्षरश: सत्य घटित होती थी |उच्चादर्शों से युक्त सादा जीवन कैसे जिया जाये, आपका जीवन इसकी मिसाल था | इन्ही गुणों के चलते आप गांधी वध तथा आपात काल में जब राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ पर प्रतिबन्ध लगा तो जेल गये | भारतीय संस्कृति से अनुप्रमाणित अनुभवों को मूर्तरूप देने के उद्देश्य से प्रेरित होकर ही आपने सन् १९६८ से सरस्वती ज्ञान मन्दिर संस्थान की स्थापना की | जिसके अन्तर्गत सरस्वती ज्ञान मन्दिर इन्टर कॉलेज आजाद नगर तथा सरस्वती ज्ञान मन्दिर इण्टर कॉलेज इन्दिरा नगर विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा निर्देशित चल रहे है |


thumb_sampleimage_4.jpgआप संगठन शास्त्र के कुशल नियोजक थे | व्यवस्था एंव नियोजन आपक की विशेषता थी | स्वावलम्बन एंव स्वाभिमान आपकी थाती थी |इसी से प्रेरित होकर अपने बल बूते पर कुछ कर दिखाने की तमन्ना से आभाव की ज़िन्दगी में भी सादा जीवन व्यतीत करते हुए, शून्य से प्रारम्भ कर इन्होंने जिस प्रकार ज्ञान मन्दिर शिक्षा संस्थान को आगे बढाया,यह इनके कुशल संगठन एंव नियोजकता का ही परिणाम था |अल्प आय में भी व्यवस्थित जीवन जीने की कला म आप सिद्धहस्त थे |बच्चों के बीच में घुल-मिल जाना आपका स्वभाव था | अपने इसी स्वाभाव के कारण वह विद्यालय के छात्रावासी छात्रों के अन्तर्मन की बात निकलवा लेते थे तथा सभी अपनी समस्याये उनके समक्ष बेझिझक रखते थे | आप स्वाभाविक संगीत प्रेमी तथा सांस्कृतिक, शारीरिक कार्यक्रमों के सजग प्रहरी थे |यही कारण था कि अपने शिक्षण संस्थान में इन गतिविधियों को इन्होंने स्थान दिया और उन्हें शिक्षा का अंग बनाया | आप इन्दिरा नगर विधालय के विज्ञान विधालय के रूप में विकसित करना चाहते थे | विषय के समुचित प्रतिपादन के लिए प्रयोग आधारित शिक्षा के समर्थक थे |जिसके परिणाम स्वरुप आपने सम्रध्द प्रयोगशालायें एंव पूर्ण व्यवस्थित एंव सुसज्जित आधुनिकतम व्याखानशाला का निर्माण कराया | विज्ञान के समुचित अध्ययन तथा विधार्थियों के सर्वागीण विकास के लिये आप एक कार्यशाला का निर्माण करना चाहते थे | गंभीर रूप से अस्वस्थ होने के बाद भी उन्होंने विज्ञान कार्यशाला "अन्वेषिका" का निर्माण करा कर अपने स्वप्न को साकार किया | अस्वस्थता के समय चिकित्सा क्षेत्र में व्याप्त अनिमितिताओं एंव उपेक्षाओं से व्यथित होकर आप जनसामान्य के निमित्त एक चिकित्सालय का निर्माण करना चाहते थे तथा विद्यालय परिसर में आपकी मन्दिर निर्माण कि परिकल्पना थी | किन्तु आपकी यह अन्तिम इच्छा पूर्ण न हो सकी और वे ३० जनवरी सन २००१ मंगलवार को ब्रह्मलीन हो गये | आज वे हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके सहचर्य में व्यतीत किये गये क्षण तथा उनका यथार्थवाद जीवन तथा उनके आदर्श ही हमारे सम्बल है |हम उनके बताये हुए मार्ग पर चल सके यही प्रभु से प्रार्थना है|